नीम करौली बाबा (नीब करौरी बाबा, नीम करोली बाबा), जिन्हें भक्त महाराज जी कहते हैं, हनुमान जी के अनन्य भक्त और उत्तर भारत के प्रसिद्ध संत थे। उनका देहांत 1973 में हुआ, फिर भी आज लोग कैंची धाम में उनके दर्शन के लिए जाते हैं। Be Here Now किताब, डॉक्यूमेंट्री और 2026 की दो हिंदी फ़िल्मों ने उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाया है।
यह पेज एक शुरुआती गाइड है: वे कौन थे, उनका नाम कैसे पड़ा, उनकी शिक्षाएं क्या थीं और इस साइट पर आगे कहां पढ़ें। जहां कोई बात दस्तावेज़ों पर नहीं, बल्कि भक्तों की यादों पर टिकी है, वहां मैंने यह साफ़ लिख दिया है।
नीम करौली बाबा कौन थे?
उनका जन्म लक्ष्मण नारायण शर्मा के नाम से, लगभग 1900 में, उत्तर प्रदेश के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। गांव को लेकर स्रोतों में मतभेद है। सबसे ज़्यादा अकबरपुर का नाम मिलता है, पर कुछ स्रोत फ़िरोज़ाबाद ज़िले की बात करते हैं। उस दौर की तारीख़ें पक्की नहीं हैं, और यह मान लेना ही ईमानदारी है।
युवावस्था में उन्होंने घर छोड़ा और भटकते रहे। कुछ साल गृहस्थ जीवन में लौटे, फिर दोबारा घर छोड़ दिया। अलग-अलग जगहों पर उन्हें अलग नाम मिले: लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा, तिकोनिया वाले बाबा, गुजरात में तलैया वाले बाबा, वृंदावन में चमत्कारी बाबा, और हमेशा कंबल साथ रखने की वजह से “ब्लैंकेट बाबा”।
“नीम करौली” नाम कैसे पड़ा?
यह नाम फ़र्रुखाबाद ज़िले के गांव नीम करौली (नीब करौरी) से आया है, जहां शुरुआती सालों में वे काफ़ी समय रहे। भक्तों में एक कथा चलती है कि बिना टिकट सफ़र करने पर उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया और ट्रेन तब तक आगे नहीं बढ़ी जब तक उन्हें वापस नहीं बिठाया गया। इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता, इसलिए इसे श्रद्धा की कथा ही समझिए।
सीधी वजह गांव का नाम है। उनके पश्चिमी भक्तों को “करौरी” बोलना मुश्किल लगता था, इसलिए “नीम करोली” ही प्रचलित हो गया।

कैंची धाम
लोग जब “महाराज जी का आश्रम” कहते हैं, तो अक्सर उनका मतलब नैनीताल के पास उत्तराखंड में बने कैंची धाम से होता है। यह आश्रम 1964 में स्थानीय निवासी पूर्णानंद की दी हुई ज़मीन पर बना और इसके केंद्र में हनुमान मंदिर है। 1973 के बाद उनकी अस्थियां यहां स्थापित हुईं और मंदिर बना।
उनके और भी आश्रम हैं: वृंदावन, ऋषिकेश, हनुमानगढ़ी, नीम करौली गांव, और अमेरिका के टाओस (न्यू मेक्सिको) में एक केंद्र। 11 सितंबर 1973 को उन्होंने वृंदावन में देह त्यागी।
पढ़ें: Neem Karoli Baba’s Miracles: The Stories That Still Draw Thousands to Kainchi Dham (अंग्रेज़ी में)
हनुमान जी के भक्त
उनकी लगभग हर बात हनुमान जी पर आकर टिकती है। भक्तों के अनुसार उन्होंने करीब 108 हनुमान मंदिर बनवाए, पर यह संख्या परंपरा से आई है और इसे जांचना मुश्किल है। कहा जाता है कि जब लोग पूछते थे कि नीम करौली बाबा कहां मिलेंगे, तो वे हनुमान मंदिर में जाकर प्रार्थना करने को कहते और खुद को बस प्रसाद बांटने वाला बताते थे।
बहुत से भक्त मानते हैं कि वे हनुमान जी के ही रूप थे। वे खुद यह श्रेय हमेशा टाल देते थे।
पढ़ें: हनुमान चालीसा की हर पंक्ति में दिव्य शक्ति और हनुमान जी की पूजा के लाभ (अंग्रेज़ी में)
शिक्षाएं: प्रेम करो, सेवा करो, स्मरण करो
उनका सूत्र छोटा था: प्रेम करो, सेवा करो, स्मरण करो। वे यह भी कहते थे, “सब एक”। उन्होंने किसी से धर्म बदलने को नहीं कहा। हर पृष्ठभूमि के लोगों से लगभग एक ही बात कही: सबसे प्रेम करो, भूखे को खिलाओ और भगवान का नाम जपो।
वे लोगों को किताबों के बजाय रसोई में भेजते थे। जो सामने है उसकी सेवा करो, राम का नाम लो। बात इतनी ही है। सुनने में आसान लगती है, करने में नहीं।
पढ़ें: 3 Core Teachings on Love, Service & Devotion, The Essential Guide to His Teachings और प्रेमानंद महाराज: नाम जप और गुरु स्मरण (अंग्रेज़ी में)
चमत्कार और भक्तों की कहानियां
वृंदावन में उन्हें चमत्कारी बाबा कहा जाता था। भक्त बताते हैं कि वे मन की बात बिना बोले जान लेते थे और भंडारे में प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता था। उनके देहांत के लगभग दो साल बाद डिवाइन लाइफ़ सोसाइटी के स्वामी चिदानंद ने लिखा कि करीबी भक्तों ने उन्हें एक ही समय दो जगह देखने की बात कही थी।
इनमें से कुछ बातों की साधारण व्याख्या भी हो सकती है, जैसे आश्रम में सेवा और भोजन की व्यवस्था। मैं यहां फ़ैसला नहीं सुना रहा। ये उन लोगों की कहानियां हैं जो वहां थे, या जिन्होंने वहां मौजूद लोगों से सुनी।
एक कहानी जो मेरे साथ रह गई, वह शादी के दिन हुए हादसे और सिद्धि माँ के दरवाज़े पर आए फ़कीर की है: Rabbu Dada’s Wedding Day Accident (अंग्रेज़ी में)
विदेशी भक्त और राम दास
1967 में रिचर्ड अल्पर्ट उनसे मिले और उन्हें नाम मिला राम दास, यानी “राम का सेवक”। राम दास की किताब Be Here Now, और भगवान दास तथा कृष्ण दास के लेखन और कीर्तन की वजह से पश्चिम में उनका नाम फैला।
उन पर कई डॉक्यूमेंट्री भी बनी हैं, जैसे American Yogi, Windfall of Grace और Moved by Grace।
स्टीव जॉब्स, ज़करबर्ग और टेक की कहानी
यह वह हिस्सा है जो सबसे ज़्यादा गलत बताया जाता है। स्टीव जॉब्स 1974 में भारत आए और कैंची धाम गए, लेकिन नीम करौली बाबा एक साल पहले ही देह त्याग चुके थे। दोनों कभी मिले नहीं। मार्क ज़करबर्ग ने कहा है कि वे 2015 में जॉब्स की सलाह पर वहां गए थे।
पूरी कहानी: Neem Karoli Baba and Steve Jobs: The Story Nobody Tells Fully (अंग्रेज़ी में)
2026 में वे फिर चर्चा में क्यों हैं?
2026 में उन पर दो हिंदी फ़िल्में आईं: Shree Baba Neeb Karori Maharaj, जिसमें सुबोध भावे ने बाबा की भूमिका निभाई, और Hanuman Ansh। अगर आप किसी फ़िल्म के बाद यहां पहुंचे हैं, तो ऊपर के हिस्से और नीचे दिए लेख आगे पढ़ने की अच्छी जगह हैं।
इस साइट पर और कहानियां
- The Hidden History of Neem Karoli Baba
- The Hidden Truth About God: Neem Karoli Baba’s Essential Teachings
- Rabbu Dada’s Wedding Day Miracle
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नीम करौली बाबा कौन थे?
हिंदू संत और हनुमान जी के भक्त, जिनका जन्म लगभग 1900 में उत्तर प्रदेश में हुआ। भक्त उन्हें महाराज जी कहते हैं। वे कैंची धाम और “प्रेम करो, सेवा करो, स्मरण करो” की शिक्षा के लिए जाने जाते हैं।
नीम करौली बाबा का देहांत कब हुआ?
11 सितंबर 1973 को वृंदावन में।
कैंची धाम कहां है?
उत्तराखंड में नैनीताल के पास, नैनीताल से अल्मोड़ा वाले रास्ते पर। आश्रम 1964 में स्थापित हुआ।
उन्हें नीम करौली बाबा क्यों कहते हैं?
फ़र्रुखाबाद ज़िले के नीम करौली (नीब करौरी) गांव के नाम पर, जहां वे शुरुआती सालों में रहे।
क्या नीम करौली बाबा हनुमान जी थे?
कई भक्त उन्हें हनुमान जी का रूप मानते हैं। उन्होंने खुद ऐसा कभी नहीं कहा और लोगों को हनुमान मंदिर जाने को कहा करते थे।
“सब एक” का क्या मतलब है?
“सब एक है।” यह उनकी सबसे ज़्यादा दोहराई जाने वाली बातों में से एक थी, और उनके इस विचार का सार है कि सभी लोग और सभी रास्ते एक-दूसरे से जुड़े हैं।
क्या स्टीव जॉब्स नीम करौली बाबा से मिले थे?
नहीं। जॉब्स 1974 में कैंची धाम गए, यानी बाबा के देहांत के एक साल बाद।
स्रोत और आगे पढ़ने के लिए
- Wikipedia: Neem Karoli Baba और Kainchi Dham
- Hindupedia: Neem Karoli Baba
- Penguin India: Who was Neem Karoli Baba? (Sri Siddhi Ma से अंश)
- स्वामी चिदानंद, डिवाइन लाइफ़ सोसाइटी: Baba Neem Karoli, A Wonder Mystic of Northern India